रोहिंग्या मुसलमानों की मदद के लिए आगे आए सिख, बांग्लादेश-म्यामांर बॉर्डर पर शुरू किया लंगर

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 नई दिल्ली: सिख समुदाय के लोगों ने एक बार फिर इंसानियत की मिसाल पेश की है। मददगारों की मदद के लिए ये समुदाय हर वक्त तैयार रहता है। इस बार सिख संगठन के लोग बांग्लादेश-म्यामांर के बॉर्डर पर पहुंचकर म्यामांर से आए लाखों रोहिंग्या मुसलमानों की मदद कर रहे हैं।

बता दें कि म्यामांर का रोहिंग्या मुसलमान समुदाय लगातार अपने देश से किसी भी तरह निकलकर बांग्लादेश और भारत में पहुंच रहे हैं। इनका कहना है कि म्यांमार की सेना रोहिंग्या का कत्लेआम कर रही है और औरतों का रेप कर रही है। रोहिंग्याओं के साथ अमानवीय बर्ताव के लिए दुनियाभर में म्यांमार आलोचना का सामना कर रहा है।

म्यांमार में बौद्ध आबादी बहुसंख्यक है वहीं करीब 11 लाख रोहिंग्या मुसलमान हैं। जिन्हें म्यामांर का एक बड़ा वर्ग बंगाली कहता है। म्यांमार की सरकार ने उन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया है। पिछले पांच-छह सालों से वहां सांप्रदायितक हिंसा देखने को मिल रही है। जिसके चलते वहां की सेना भी इन पर हमले कर रही है, जिसके बाद ये किसी भी तरह से वहां से निकल रहे हैं।

वहीं म्यांमार के अल्पसंख्यक रोहिंग्या मुसलमानों की मदद के लिए सिख समुदाय के लोग आए आए हैं। इस तस्वीर को देख वाकई आप दिल से सिख संगठन खालसा एड के वॉलिन्टियर्स को सैल्यूट करेंगे। सिख वॉलिन्टियर्स ने इंसानियत दिखाते हुए बांग्लादेश बॉर्डर पर लाखों परिवार की मदद के लिए एकजुट हो गए हैं। उनके लिए खाने-पीने और रहने की व्यवस्था करने में मदद कर रहे हैं।

‘संगठन के मैनेजिंग डायरेक्टर अमरप्रीत सिंह ने बताया है कि वह करीब 50 हजार परिवारों के हिसाब से सहायता सामाग्री लाए थे, लेकिन यहां लेकिन यहां 2 लाख से ज्यादा लोग हैं, जो बिना खाने, पानी और घर के रह रहे हैं। जिसको जहां जगह मिल रही है, वो वहीं बैठा है।

बांग्लादेश बॉर्डर के गांव टेकनफ में रोहिंग्या शरणार्थी कैंप में रह रहे हैं, शिविरों में लोगों का सैलाब उमड़ गया है। ऐसे में यहां हालात खराब हैं। सिंह ने बताया कि वह चाहते हैं कि इन परिवारों की ज्यादा से ज्यादा मदद की जाए। सिर ढकने की सुविधा दी जा सके। सिंह ने कहा कि हम अपनी तरफ से लोगों की मदद की कोशिश करेंगे।

इस दल के एक दूसरे सदस्य जीवनजोत सिंह ने बताया कि ये लोग 10 दिनों तक पैदल चलकरर म्यांमार से यहां पहुंचे हैं, इनकी हालत बहुत खराब है। इन लोगों की मदद के लिए हम यहां पहुंचे हैं। इन लोगों को खाना-पानी और रहने की जगह देने के लिए हम यहां पहुंचे हैं।

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