अन्तराष्ट्रीय

हिंद महासागर में अपनी सामरिक स्थिति मजबूत करने के लिहाज से भारत को मिली बड़ी सफलता

हिंद महासागर में अपनी सामरिक स्थिति मजबूत करने के लिहाज से भारत को बड़ी सफलता मिली है. भारत को ओमान के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह दुकम तक अपने जहाज भेजने की इजाजत मिल गई है. पीएम मोदी की ओमान यात्रा के दौरान इस पर बात हुई. चीन ने अगर पाकिस्तानी ग्वादर पोर्ट तक पहुंच बनाई है तो अब भारत को ईरान के चाबहार और ओमान के दुकम पोर्ट तक पहुंच मिल गई है.

इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है. पाकिस्तान से लेकर मध्य एशिया तक चीन के बढ़ते प्रभाव के लिहाज से इसे एक बड़ी सफलता कहा जा सकता है. भारत को ईरान के चाबहार बंदरगाह तक व्यावसायिक पहुंच पहले ही हासिल हो गई थी. अब ओमान के महत्वपूर्ण दुकम एयरपोर्ट के सैन्य और लॉजिस्ट‍िकल सपोर्ट के लिए इस्तेमाल करने की इजाजत मिल गई है. इसे पीएम मोदी की दो दिवसीय ओमान यात्रा की बड़ी उपलब्ध‍ि मानी जा सकती है.

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने ओमान के सुल्तान सैयद कबूस बिन सईद अल सईद से मुलाकात की थी और इस दौरान दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग एक के एक समझौते पर भी दस्तखत हुए हैं. इस समझौते के लागू होने के बाद दुकम बंदरगाह और ड्राई डॉक का इस्तेमाल भारतीय सैन्य जहाज के रखरखाव के लिए किया जा सकेगा.

दुकम बंदरगाह ओमान के दक्ष‍िण-पूर्वी समुद्र तट पर स्थ‍ित है और यह ईरान के चाबहार बंदरगाह के करीब ही है. यहां तक पहुंच बनने के बाद भारत को हिंद महासागर के इस इलाके में सामरिक मजबूती हासिल हो जाएगी.

 

गौरतलब है कि दुकम में हाल के महीनों में भारत की गतिविधियां बढ़ गई हैं. पिछले साल सितंबर में भारत ने यहां एक पनडुब्बी भेजा था. इसके साथ वहां नौसेना का जहाज आईएनएस मुंबई और दो पी-8 आई निगरानी विमान भी गए थे.

अगस्त 2017 में ओमान ने ब्रिटेन के साथ एक समझौता कर वहां की रॉयल नेवी के जहाजों को दुकम बंदरगाह के इस्तेमाल की इजाजत दी थी. यह एक स्पेशल इकोनॉमिक जोन है जिसमें कुछ भारतीय कंपनियों द्वारा 1.8 अरब डॉलर का निवेश किया जा रहा है. पिछले साल अडानी समूह ने दुकम पोर्ट में निवेश के लिए एक समझौता किया था.

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